आकाश का बोझ सर पे गिरा,
धरती फटी, में जा गिरा,
गिरता रहाआआआआ...........
पाताल में... पाताल में... पाताल में...
जब था ज़मीन पे, सुनता में था.
आवाज़ों से बचता में था,
आवाज़ें... आवाज़ें...
गुप अंधेरे की चादर ओढ़े,
चीखतीं हैं जिंदा लाशें.
मेरे सामने, मेरे ख्वाबों में,
जब था ज़मीन पे...
तब मै मरा... तब मै मरा...
गिरता रहाआआआआ...
पाताल में, पाताल में, पाताल में...
पाताल में जब मै गिरा,
बचता रहा... बचना सका,
गिरते हुए आँखें खुली,
आँखें खुली... कुछ ना दिखा,
अंधेरा, अंधेरा, अंधेराआआआआआ...
अंधेरे में... गुम हो गया,
आवाज़ों ने पीछा किया,
मरते हुए भी... डरता गया,
गिरता रहाआआआआ...
पाताल में, पाताल में, पाताल में...
और जब मै उठा, मै उठा...
पाताल में उठा,
उसके तेज से मैं जल उठा,
तब मेरी आँखों ने देखा पहली बार उस अंधेरे को,
घेरे था मुझे जो, मेरे जीवन भर के सवेरे को,
भस्म हो गया वो अंधेरा मेरे जलते हुए शव की पतालाग्नी में,
नहीं रहा अब कोई डर मेरे इस हृदय में,
भाग गयीं वो आवाज़ें उस दैत्य अंधेरे की दुनिया में,
सो सकूंगा अब चैन से क्यूँ की मुक्ति मिली है अब मुझे...
पाताल में, पाताल में, पाताल में |
धरती फटी, में जा गिरा,
गिरता रहाआआआआ...........
पाताल में... पाताल में... पाताल में...
जब था ज़मीन पे, सुनता में था.
आवाज़ों से बचता में था,
आवाज़ें... आवाज़ें...
गुप अंधेरे की चादर ओढ़े,
चीखतीं हैं जिंदा लाशें.
मेरे सामने, मेरे ख्वाबों में,
जब था ज़मीन पे...
तब मै मरा... तब मै मरा...
गिरता रहाआआआआ...
पाताल में, पाताल में, पाताल में...
पाताल में जब मै गिरा,
बचता रहा... बचना सका,
गिरते हुए आँखें खुली,
आँखें खुली... कुछ ना दिखा,
अंधेरा, अंधेरा, अंधेराआआआआआ...
अंधेरे में... गुम हो गया,
आवाज़ों ने पीछा किया,
मरते हुए भी... डरता गया,
गिरता रहाआआआआ...
पाताल में, पाताल में, पाताल में...
और जब मै उठा, मै उठा...
पाताल में उठा,
उसके तेज से मैं जल उठा,
तब मेरी आँखों ने देखा पहली बार उस अंधेरे को,
घेरे था मुझे जो, मेरे जीवन भर के सवेरे को,
भस्म हो गया वो अंधेरा मेरे जलते हुए शव की पतालाग्नी में,
नहीं रहा अब कोई डर मेरे इस हृदय में,
भाग गयीं वो आवाज़ें उस दैत्य अंधेरे की दुनिया में,
सो सकूंगा अब चैन से क्यूँ की मुक्ति मिली है अब मुझे...
पाताल में, पाताल में, पाताल में |
Brilliant....
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